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देश के वीर जवान

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By : Aashita Jain

वो लडखडाये नही, वो खड़े थे।

वो देश के दुश्मनो के खिलाफ लड़े थे।।

उनके शरीर से निकली खून की एक एक बून्ध उन्होने देश को कर दी थी समर्पित।

उन्होने अपने बलिदान से सिर्फ हमे ही नही बल्कि पूरे देश को किया था गर्वित।।

जाते जाते भी अपने लिये  ना कुछ चाहा ना मांगा।

हम लोग सुरक्षित व चैन से रहें यही थी उनकी आशा।।

दुश्मनो ने कैसे उनको गोली मारी होगी यही सोचके डर लगता है।

वो मा भी कैसे रोई होगी, कैसे बिल्खी होगी जब पता लगा होगा उसे की उसका वीर दुश्मनो से लड़ते लड़ते मरा है।।

दुश्मनों को देखके कैसे वीर जवानो का खून खौलता है।

अपने परिवार से दूर वो अपना दर्द किसी को नही बोलता है।।

आज हमारे देश की मा रोई है।

देश की हर माँ अपने देश के वीर की शहादत पर गर्वित हुई है।।

हमारे जवान वीरगति को गये हें।

उन्हे तो जहन्नुम तक नसीब नही होगी।।

अगर उनका धर्म, उनका भगवान इतना ही सच्चा है, तो देता क्यूं नही है उनके दुश्कर्मों की सजा?

हमारे धर्म मे तो नही आता किसी को मरते देख मज़ा!

वो आज रोयी ज़रूर होगी, पर ना डरेगी ना हारेगी।

देश की माये एसे ही वीरों को देश को समर्पित करेगी, और हम सबके जीवन सवारेगी।।

Disclaimer : The opinions expressed within this poem are the personal opinions of the author. The facts and opinions appearing in the poem do not reflect the views of Crux360 and Crux360 does not assume any responsibility or liability for the same.